पीरियड्स प्रॉब्लम से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान !

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महिलाओं को हर माह मासिक चक्र से गुजरना पड़ता है, जिसे पीरियड्स कहते हैं। इस प्रक्रिया का होना महिलाओं के लिए बहुत ही जरूरी है। यह हर महीने 3 से 5 दिन तक रहती है। यही मासिक चक्र महिलाओं की प्रजनन प्रणाली में परिवर्तन लाता है, जिससे महिलाएं प्रजनन के लिए तैयार होती हैं। इस चक्र के दौरान महिलाओं की गर्भधारण करने की क्षमता बढ़ती है हालांकि कुछ महिलाओं में यह क्षमता केवल 2-3 दिनों की भी होती है। यह 12- 16 वर्ष की आयु से शुरू होकर मेनोपॉज तक चलती है। मेनोपॉज यानी कि 50 साल की आयु के करीब।

कई बार यह तय समय पर नहीं आती। इसके पीछे के कारण खाने-पीने की गलत आदतें, शरीर में खून की कमी और टैंशन हो सकते हैं। वैसे तो यह महिलाओं में होनी वाली आम सी समस्या है लेकिन इस आम परेशानी में भी किसी गंभीर बीमारी के संकेत छिपे हो सकते हैं।

पीरियड्स को अनियमित कर देती हैं इसे टालने वाली दवाएं

अक्सर महिलाएं पीरियड्स टालने वाली दवाएं लेती हैं। लेकिन इसका ज्यादा इस्तेमाल नुकसानदायक है।

इस विषय पर कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि पीरियड्स की डेट आगे बढ़ाने वाली दवाओं में प्रोजेस्टरोन होता है।

इसके कारण हार्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं, जिससे आगे चलकर पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं।

इसके अलावा पिंपल्स, मूड स्विंग व चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं होती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार इन दवाओं का जीवनकाल में एक या दो बार इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

पीरियड्स अनियमित होने का कारण

महिला के शरीर में एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन नाम के 3 हार्मोन्स मौजूद होते हैं जब इन हार्मोंन्स में किसी तरह की कोई गड़बड़ी हो जाती हैं तो पीरियड्स के अनियमित होने की प्रॉब्लम होने लगती है। अगर आप भी ऐसी ही किसी परेशानी से गुजर रहे हैं तो डाक्टर से परामर्श लें और बिना संकोच खुलकर अपनी परेशानी बताएं

यौवनारंभ

अगर किसी युवती को पहले 2 वर्षों तक अनियमित मासिक धर्म की शिकायत रहती है यह डरने वाली नहीं बल्कि यह सामान्य प्रक्रिया है लेकिन अगर यह हालात लंबे समय से चल रहे हैं तो डॉक्टर से जरूर चेकअप करवाएं।

खान-पान में गड़बड़ी

बेवक्त खाने-पीने की आदतें, पौष्टिक आहार न लेने, अचानक वजन का कम और बढ़ जाना मासिक धर्म में अनियमितता का कारण होते हैं इसलिए उचित खाने पीने के साथ अपने वजन को सामान्य बनाए रखने का प्रयास करें। डाक्टर से खान-पान से जुड़ी हर तरह की जानकारी लें। तली, डिब्बाबंद, चिप्स, केक, बिस्कुट और मीठे पेय आदि अधिक न लें। सही मासिक धर्म के लिए स्वस्थ भोजन का चयन बहुत जरूरी है। अनाज, मौसमी फल और सब्जियां, पिस्ता-बादाम, कम वसा वाले दूध से बने आहार भी रोज की खुराक में शामिल करें।

स्ट्रैस

काम या किसी अन्य परेशानी से बने तनाव का असर सीधा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन्स पर पड़ता है, जिससे रक्तस्त्राव में अनियमितता आती है।

बहुत ज्यादा व्यायाम

बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने से भी हॉर्मोनल संतुलन में बदलाव आता है। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन आपकी मासिक धर्म प्रक्रिया को सामान्य रखते हैं और जरूरत से ज्यादा व्यायाम से एस्ट्रोजन की संख्या में वृद्घि होती है, जिससे पीरियड्स रुक जाते हैं।

बीमारी

अगर महिला लगातार एक माह या उससे ज्यादा समय तक बीमार रहती है तो ऐसे में उनके रक्तस्त्राव में अलग-अलग तब्दीलियां आ सकती हैं।

थायरॉइड डिसॉर्डर

थायरॉइड होने की वजह से भी मासिक धर्म में असामान्यता हो सकती है। थायरॉइड की वजह से इस चक्र पर बहुत ज्यादा असर पड़ता है। ऐसे में खून की जांच करवाएं। अगर यह प्रॉब्लम न भी हो तो भी हर साल थायरॉइड की जांच करवाएं।

कैसे दूर करें ये परेशानी

बहुत सारी महिलाओं को इस परेशानी का सामना करना पड़ता है। महीने के यह पांच दिन दर्द, तनाव और अन्य कई समस्याओं से गुजरते हैं। बहुत सारी महिलाएं पीरियड के दर्द से छुटकारा पाने के लिए दवाइयों का सेवन करती हैं लेकिन इस समय में दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए।

खूब सारा पानी पीएं

दिन की शुरुआत हमेशा ही पानी पीकर करें। सुबह उठते ही खाली पेट 1 से 2 गिलास पानी पीएं। पूरे दिन में 8 से 10 गिलास पानी जरूर पीएं। इससे शरीर के टॉक्सिंस निकल जाते हैं और आप फिट एंड फाइन रहते हैं और पीरियड भी रैगुलर आते हैं।

पीरियड को नियमित और इससे होने वाले दर्द से छुटकारा पाने के लिए सबसे बेस्ट तरीका चक्रासन भी है। इसका नियमित अभ्यास करने से मासिकधर्म को नियमित व नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

*कैसे करेें ये आसान

  • सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं फिर पैरों को घुटनों से मोड़ लें।
  • अब दोनों हाथ की हथेलियों को कंधों के पास लाते हुए जमीन पर टिका दें। कोहनियां ऊपर की तरफ रखें।
  • ज़मीन पर थोड़ा जोर दीजिए। कंधे और छाती को आसमान की तरफ खींचें। नितंब को भी खींचें और जांघ पर दबाव डालें।
  • वहीं छाती, पेट और जांघ को अधिकतम बाहर की ओर खींचने का अभ्यास करें।
  • अब धीरे से सांस को सामान्य करते हुए नीचे आएं। इस तरह से आप इस परेशानी से मुक्ति पा सकते हैं।
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