विवाहित जीवन को सुखमय कैसे बनायें

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वैवाहिक जीवन की डोर बहुत नाजुक होती है। इस पवित्र रिश्ते को बनाये रखने के लिए कई तरह के प्रयत्न करने पड़ते हैं। लेकिन इसके बावजूद भी कुछ शादीशुदा लोगों की जिंदगी में दरार आ ही जाती है।शादी का बंधन गाड़ी के दो पहियो की तरह है और इस बंधन रूपी रिश्ते को चलाने के लिए पति और पत्नी दोनों को ही एक दूसरे के प्रति पूरे विश्वास के साथ सहयोग करना पड़ता है क्योंकि सुखी वैवाहिक जीवन के लिये जीवन के हर कदम पर हर सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ देना है। शादी एक ऐसा प्यारा रिश्ता होता है जो दो दिलो के बंधन को सिर्फ रिश्ते से ही नही बल्कि दो इन्सान के हर सुख-दुख से भी जोड़ देता है।

किसी भी शादीशुदा जिन्दगी की नींव कुछ बातों पर निर्भर करती है जैसे कि आप सुख-दुःख में आप एक दूसरे का कितना साथ देते हैं, आपके जीवनसाथी की आपके जीवन में क्या अहमियत है और एक-दूसरे के प्रति कितना भरोसा है, एक दूसरे की भावनाओं की कितनी कद्र करते हैं या नहीं आदि ये जरूरी सभी बातें सुखी वैवाहिक जीवन के लिए बहुत जरूरी होती हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि इन सभी बातों के बिना किसी भी मजबूत रिश्ते की नींव नहीं रखी जा सकती है। शादी पति-पत्नी के बीच का एक ऐसा धर्म संबंध है जो कर्तव्य और पवित्रता पर आधारित है। शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक स्तरों पर स्त्री और पुरुष दोनों ही अधूरे होते हैं। स्त्री और पुरुष के मिलन से ही ये अधूरापन दूर होता है। वैवाहिक जीवन को सुखी बनाने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखें-

अपने कर्तव्य का पालन करें-

शादी शुदा जिन्दगी में ऐसे कई मोड़ आते हैं, जहा आपको अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ जाता है। जिसका आपकी शादी-शुदा जिन्दगी पर भी प्रभाव पड़ता है। ऐसे समय में कभी भी अपने कर्तव्य को लेकर किसी भी मोड़ पर घबराना नहीं चाहिए, अपना संयम बनाये रखें और अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटें बल्कि एक दूसरे का भरपूर सहयोग करें। इस तरह से सुखी वैवाहिक जीवन की नींव रखें।

अपने पर रखे काबू

जीवन में कई मोड़ ऐसे आते हैं जब इंसान अपना संयम खो बैठता है और गुस्से में बहुत कुछ गलत कर बैठता है जिस कारण संबंधों में दरार आने लगती है। इसलिए वैवाहिक जीवन की डोर को टूटने से बचाने के लिए अपने गुस्से पा काबू रखें और समस्या से निपटने के लिए आपस में बैठकर समस्या का निदान करें।

संतुष्ट रहे

संतुष्टि यानी हर परिस्थिति में एक दूसरे का साथ देते हुए जो भी आपको मिल जाएँ उसी में संतुष्ट रहना चाहिए क्योंकि यदि आप संतुष्ट नहीं होंगे तो आपके मन में कई तरह के गलत विचार पनपने लगेंगे। इसीलिए जरुरी हैं कि आप एक दूसरे के प्रति संतुष्टि बनाएं रखें क्योंकि ये सुखी वैवाहिक जीवन के लिए बहुत जरूरी है।

संतान की अहमियत

वैवाहिक जीवन में संतान का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। पति-पत्नी के बीच के संबंधों को मधुर और मजबूत बनाने में बच्चों की भी अहम भूमिका होती है।

संवेदनशीलता

पति-पत्नी के रूप में एक दूसरे की भावनाओं का समझना और उनकी कद्र करना चाहिए। श्रीराम और सीता के बीच संवेदनाओं का गहरा रिश्ता था। दोनों बिना कहे-सुने ही एक दूसरे के मन की बात समझ जाते थे।

शारीरिक, आर्थिक और मानसिक मजबूती

वैवाहिक जीवन की सफलता और खुशहाली बनाये रखने के लिए पति-पत्नी दोनों का शारीरिक, आर्थिक और मानसिक रूप से मजबूत होना बहुत ही आवश्यक है।

एक दूसरे के प्रति समर्पण

वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी का एक दूसरे के प्रति पूरा समर्पण और त्याग होना भी आवश्यक है। एक-दूसरे की खातिर अपनी कुछ इच्छाओं और आवश्यकताओं को त्याग देना या समझौता कर लेना रिश्तों को मधुर बनाए रखने के लिए जरूरी होता है।

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